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बदला है तुम्हारा मन क्या?
तारीख बदली है साल बदला है पर बदला है तुम्हारा मन क्या? है जश्न चारों ओर उमंग का न बूझे छोर पर क्या खोज पाए हो अपने मन की डोर? फैला है चहुँओर...
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एक शहर ऐसा भी जो अक्सर वीरान रहता है सबको महफूज़ कर खुद सुनसान रहता है। गली-नुक्कड़ों पर भीड़भाड़ वाले चौराहों पर अक्सर थम-सा जाता है य...
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कोई जख्म नहीं, कोई घाव नहीं, फिर भी मलहम की फ़िराक में हूँ, कोई निंदक नहीं, कोई दुश्मन नहीं, फिर भी एक कवच की तलाश में हूँ। कोई ल...
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अंडररेटेड काम ओवररेटेड सम्मान कुछ और कर पाने में रहे नाकाम इसलिए बन गए शिक्षक राम यही लगता है न तुम्हें? तो सुनो, ये शिक्षक ही ओवररेटेड ज...
Nice one .. यूँ तो सभी को ज़िंदगी में सब पूरा चाइए मगर
ReplyDeleteआधा इश्क़ और आधा चाँद इसका मज़ा कुछ और ही है...
Sach :)
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