Subscribe to:
Post Comments (Atom)
बदला है तुम्हारा मन क्या?
तारीख बदली है साल बदला है पर बदला है तुम्हारा मन क्या? है जश्न चारों ओर उमंग का न बूझे छोर पर क्या खोज पाए हो अपने मन की डोर? फैला है चहुँओर...
-
अंडररेटेड काम ओवररेटेड सम्मान कुछ और कर पाने में रहे नाकाम इसलिए बन गए शिक्षक राम यही लगता है न तुम्हें? तो सुनो, ये शिक्षक ही ओवररेटेड ज...
-
मैंने अपने छोटे कस्बे में कल, मैले कश्मीर को देखा है.. उसकी खूबसूरती से परे पसरा खौफ देखा है। लाठियों को बरसते देखा है, इंसानियत को तरस...
-
शिव ने चुना गृहस्थ जीवन बुद्ध ने त्याग दिया परन्तु दोनों ही निर्विकार हुए क्योंकि अपने मन को आकार दिया। त्याग एक साध्य है गृहस्थ एक सा...
Nice one .. यूँ तो सभी को ज़िंदगी में सब पूरा चाइए मगर
ReplyDeleteआधा इश्क़ और आधा चाँद इसका मज़ा कुछ और ही है...
Sach :)
Delete