बेचैनियां ओढ़े बैठा शख्स
बड़ा मोहक सा लगता है।
उसके भीतर
कुछ पाने की जिद है
उस पा लेने के पीछे
कुछ खोने का डर भी।
उस डर से पार पाने के
कईं तरीके हैं उसके पास
पर हर तरीके के साथ हैं
कुछ डिस्क्लेमर।
बड़ा मोहक सा लगता है।
उसके भीतर
कुछ पाने की जिद है
उस पा लेने के पीछे
कुछ खोने का डर भी।
उस डर से पार पाने के
कईं तरीके हैं उसके पास
पर हर तरीके के साथ हैं
कुछ डिस्क्लेमर।
ये बेचैनियाँ कब राहत देंगी
भला कौन जाने
पर तय है कि जब कभी
बेचैनियां दूर होंगी
चैन की परिभाषा कुछ बदली सी होगी।।
भला कौन जाने
पर तय है कि जब कभी
बेचैनियां दूर होंगी
चैन की परिभाषा कुछ बदली सी होगी।।