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बदला है तुम्हारा मन क्या?
तारीख बदली है साल बदला है पर बदला है तुम्हारा मन क्या? है जश्न चारों ओर उमंग का न बूझे छोर पर क्या खोज पाए हो अपने मन की डोर? फैला है चहुँओर...
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मैंने अपने छोटे कस्बे में कल, मैले कश्मीर को देखा है.. उसकी खूबसूरती से परे पसरा खौफ देखा है। लाठियों को बरसते देखा है, इंसानियत को तरस...
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अंडररेटेड काम ओवररेटेड सम्मान कुछ और कर पाने में रहे नाकाम इसलिए बन गए शिक्षक राम यही लगता है न तुम्हें? तो सुनो, ये शिक्षक ही ओवररेटेड ज...
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शिव ने चुना गृहस्थ जीवन बुद्ध ने त्याग दिया परन्तु दोनों ही निर्विकार हुए क्योंकि अपने मन को आकार दिया। त्याग एक साध्य है गृहस्थ एक सा...